डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन द्वारा ईरान पर लगाए गए अधिकतम दबाव की नीति के बावजूद, तेहरान क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर फिर से एकीकृत होने की स्थिति में पहुँच सकता है। ट्रम्प की नीति का उद्देश्य ईरान को अलग-थलग करना था, लेकिन इसके विपरीत, इसने ईरान को रूस और चीन जैसे देशों के साथ और अधिक घनिष्ठ संबंध बनाने के लिए प्रेरित किया। इन नए गठबंधनों से ईरान की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति मजबूत हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के साथ बातचीत फिर से शुरू होने की संभावना बढ़ गई है, खासकर यदि अमेरिका की नीति में बदलाव होता है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों के साथ भी ईरान के संबंध सुधारने की गुंजाइश है। इस प्रकार, ट्रम्प प्रशासन की नीति का अनपेक्षित परिणाम ईरान का क्षेत्रीय और वैश्विक मंच पर पुन: प्रवेश हो सकता है।