अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते पर जल्द सहमति की संभावना नहीं दिख रही है। दोनों देशों के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर सहमति बनी है, जिसे वाशिंगटन और तेहरान दोनों ही वास्तविक मानते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प की वार्ता शैली और रणनीति इस समझौते को जटिल बना रही है। इस एमओयू के बावजूद, कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी भी मतभेद बने हुए हैं। फिलहाल, दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी एक बड़ी बाधा है। समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए दोनों देशों को रियायतें देने के लिए तैयार रहना होगा।
