अमेरिकी सांसदों को ईरान के साथ हुए समझौते की जानकारी नहीं है, जबकि पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे कांग्रेस को भेजने का निर्णय लिया है। इस समझौते से जुड़े दस्तावेज़ अभी तक कई सांसदों तक नहीं पहुंचे हैं, जिससे रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों में नाराज़गी है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी कानून के तहत, इस तरह के समझौते को कांग्रेस की मंजूरी की आवश्यकता हो सकती है। यदि ऐसा होता है, तो रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य इस समझौते का विरोध कर सकते हैं। ट्रंप के इस कदम से समझौते पर राजनीतिक विवाद बढ़ने की संभावना है। यह कदम बाइडेन प्रशासन के लिए एक चुनौती पेश कर सकता है, क्योंकि उन्हें कांग्रेस में समर्थन जुटाना होगा। इस समझौते का विवरण सार्वजनिक होने के बाद ही इसकी पूरी तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी।
