अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ एक नए समझौते को लेकर आगे बढ़ रहे हैं, जिसे वे अपनी जीत के रूप में पेश करने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, इस प्रस्ताव में ईरान को दी जा रही रियायतें, पूर्ववर्ती ओबामा प्रशासन द्वारा किए गए JCPOA समझौते की उन शर्तों से मिलती-जुलती हैं जिनकी ट्रंप ने पहले कड़ी आलोचना की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन को अब उन रियायतों को स्वीकार करना पड़ रहा है जिनसे वे पहले बचना चाहते थे। यह कदम ईरान के साथ तनाव कम करने के प्रयासों का हिस्सा है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह ट्रंप की पिछली नीतियों के विरोधाभासी है। इस समझौते में ईरान पर लगे प्रतिबंधों में कुछ ढील दी जा सकती है, जिसके बदले में ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों पर नियंत्रण रखने के लिए सहमत होगा। यह समझौता अभी भी शुरुआती चरण में है और इसकी सफलता अनिश्चित है। इस प्रस्ताव पर घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।