पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ शांति स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी नीतियां चिंताजनक हैं। ट्रंप का मानना है कि तेहरान में शासन बदल गया है और अब वह कट्टरपंथी नहीं रहा, हालांकि इस दावे को लेकर संदेह है। उन्होंने इज़राइल पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है, क्योंकि इज़राइल ईरान के खतरे को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कर रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप का यह रवैया 1930 के दशक में पश्चिमी देशों द्वारा हिटलर के प्रति अपनाई गई समझौतावादी नीति की याद दिलाता है। इस नीति के परिणामस्वरूप द्वितीय विश्व युद्ध हुआ था। ट्रंप की ईरान के प्रति नरम नीति और इज़राइल पर दबाव बनाने की रणनीति क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा सकती है। यह कदम इज़राइल की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है।
