पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल अप्रैल में पारस्परिक शुल्क नीति की घोषणा से कुछ दिन पहले आयात शुल्क दरें तय की थीं। जानकारी के अनुसार, उन्होंने सरकारी डेटा पर अविश्वास करते हुए गूगल पर खोजबीन करके दरें निर्धारित कीं। यह खुलासा दर्शाता है कि ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति निर्माण प्रक्रिया में अनौपचारिक तरीकों का उपयोग किया गया था। इस घटना ने वैश्विक व्यापार पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला, क्योंकि ट्रंप के शुल्क निर्णयों ने अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को हिला दिया था। यह भी संकेत मिलता है कि नीतिगत फैसलों में आधिकारिक स्रोतों की बजाय व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को महत्व दिया गया था। इस मामले ने ट्रंप के शासनकाल में नीति निर्धारण की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटनाक्रम अमेरिकी व्यापार नीति के भीतर आंतरिक कामकाज पर प्रकाश डालता है।