अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया है कि उन्होंने जुलाई में तुर्की में नाटो शिखर सम्मेलन के बाद एयर फोर्स वन से गुप्त रूप से उड़ान भरी थी। यह कदम ईरान से उत्पन्न खतरे के कारण उठाया गया था, जिसके फलस्वरूप उन्होंने विमान बदला। एसोसिएटेड प्रेस (एपी) के अनुसार, ट्रंप ने स्थिति की गंभीरता और उनके साथ यात्रा करने वाले व्हाइट हाउस के अधिकारियों, सुरक्षा कर्मियों, सहायक कर्मचारियों और पत्रकारों के जोखिम को कम करके आंका है। ट्रंप ने विमान में मौजूद लोगों को खतरे से अवगत कराने से इनकार किया। उनकी इस कार्रवाई से सुरक्षा प्रोटोकॉल और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। इस घटना ने एयर फोर्स वन की सुरक्षा को लेकर भी चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्ट बताती है कि ट्रंप ने खतरे को मामूली बताया, जबकि वास्तविकता में स्थिति अधिक गंभीर थी।