अमेरिकी राष्ट्रपति ने अगस्त २०२८ से जेनेरिक दवाओं पर १००% आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है। उनका कहना है कि इस कदम का उद्देश्य दवा उत्पादन को संयुक्त राज्य अमेरिका में वापस लाना है। यह शुल्क वर्तमान में आयात की जा रही जेनेरिक दवाओं पर लागू होगा। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि इससे अमेरिकी फार्मास्युटिकल उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा और अमेरिकी नौकरियां बढ़ेंगी। आलोचकों का मानना है कि इससे दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं और मरीजों के लिए स्वास्थ्य सेवा और महंगी हो जाएगी। यह कदम वैश्विक व्यापार संबंधों पर भी असर डाल सकता है। इस नीति के परिणामस्वरूप, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और उपभोक्ताओं दोनों को संभावित रूप से वित्तीय बोझ का सामना करना पड़ सकता है।