ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद-बाघेर घलीबाफ़ ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस्लामाबाद समझोते पर हस्ताक्षर करके प्रतिरोध मोर्चे को संयुक्त राज्य अमेरिका की मान्यता प्रदान की। उनका कहना है कि यह समझौता, अप्रत्यक्ष रूप से इस मोर्चे की वैधता को स्वीकार करता है। घलीबाफ़ ने इस कदम को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में वर्णित किया। यह समझौता ईरान और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समझौते से क्षेत्रीय स्थिरता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यह कदम अमेरिका के मध्य पूर्व नीति में एक उल्लेखनीय बदलाव का संकेत देता है। इस पहल के परिणामस्वरूप, प्रतिरोध मोर्चे का प्रभाव और भी बढ़ सकता है।