इस सप्ताह जारी एक ज्ञापन के बाद, 2015 के एक कानून पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है जिसके तहत ईरान के साथ किसी भी परमाणु समझौते के लिए कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक है। यह कानून पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में पारित किया गया था। अब सवाल यह है कि क्या पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के साथ किसी भी समझौते की जानकारी कांग्रेस को देनी होगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ज्ञापन एक 'समझौते' के रूप में योग्य हो सकता है, जिसके लिए कांग्रेस को सूचित करना अनिवार्य होगा। ट्रंप प्रशासन ने पहले ईरान परमाणु समझौते से हटने का फैसला किया था। वर्तमान स्थिति में, यह स्पष्ट नहीं है कि ज्ञापन को औपचारिक 'समझौते' के रूप में माना जाएगा या नहीं, लेकिन इस मुद्दे पर कानूनी बहस जारी है। कांग्रेस के सदस्यों ने भी इस मामले में जानकारी मांगी है।