सीनेटर इरविन टुलफो ने शीर्ष सरकारी अधिकारियों पर ‘काम न हो, तो वेतन नहीं’ नियम लागू करने की वकालत की है। उनका कहना है कि यह नियम केवल सामान्य सरकारी कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए। टुलफो का यह बयान सरकारी कर्मचारियों के वेतन और जवाबदेही से जुड़े एक व्यापक मुद्दे के संदर्भ में आया है। उनका तर्क है कि यदि कोई अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करता है, तो उसे वेतन का भुगतान नहीं किया जाना चाहिए। इस प्रस्ताव का उद्देश्य सरकारी अधिकारियों में कार्यकुशलता और जवाबदेही की भावना को बढ़ावा देना है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस प्रस्ताव को किस प्रकार लागू किया जाएगा या इसे कितना समर्थन मिलेगा। टुलफो के इस बयान से सरकारी कर्मचारियों के भीतर बहस छिड़ने की संभावना है।