विभिन्न संस्कृतियों के लोगों में शरीर के कुछ खास हिस्सों पर गुदगुदी होने का अनुभव समान होता है। हाल ही में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि गुदगुदी की संवेदनशीलता शरीर के विशिष्ट क्षेत्रों जैसे पसलियों, पैर के तलवों और गले में लगभग सभी संस्कृतियों में पाई जाती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह समानता मानव विकास के दौरान विकसित हुई होगी, संभवतः सामाजिक बंधन और खेल के माध्यम से। गुदगुदी, एक सामाजिक संकेत के रूप में, दूसरों के साथ अंतरंगता और विश्वास बनाने में मदद कर सकती है। यह अध्ययन दर्शाता है कि कुछ शारीरिक अनुभव सार्वभौमिक होते हैं, जो संस्कृति से परे मानव जीव विज्ञान को दर्शाते हैं। गुदगुदी की यह सार्वभौमिकता, मानव स्वभाव की मूलभूत समझ प्रदान करती है। यह खोज, मानव व्यवहार और सामाजिक संपर्क के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान देती है।