नए अध्ययन के अनुसार, 'एशिया का जल टावर' कहे जाने वाले तिब्बती पठार की स्थिरता खतरे में है। नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित अध्ययन में, क्षेत्र की अराजकता और अव्यवस्था को मापने के लिए एंट्रॉपी का विश्लेषण किया गया। परिणामों से पता चला है कि पठार अधिक अप्रत्याशित और अस्थिर भविष्य की ओर बढ़ रहा है। यह अध्ययन नेपाल-चीन सीमा पर हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ से पहले जारी किया गया था, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए। शोधकर्ताओं का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण यह अस्थिरता बढ़ रही है। तिब्बती पठार, एशिया की कई प्रमुख नदियों का स्रोत है, इसलिए इसकी स्थिरता पूरे क्षेत्र के जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इस अध्ययन से इस क्षेत्र में भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।