एक महिला ने अपने रिश्ते में मानसिक हिंसा का अनुभव किया। थेरेपी सत्रों के दौरान, स्थिति असामान्य रूप से बदल गई। उसे यह महसूस होने लगा कि गलती उसकी थी, न कि उसके साथी की। यह एक चौंकाने वाला अनुभव था जिसने उसे खुद पर सवाल उठाने के लिए मजबूर कर दिया। थेरेपी ने अनजाने में ही उसे दोषी ठहराना शुरू कर दिया। इस घटना ने मानसिक हिंसा के पीड़ितों के लिए थेरेपी की जटिलताओं और संभावित खतरों पर प्रकाश डाला है। यह मामला दर्शाता है कि कैसे थेरेपी प्रक्रिया में भी, शक्ति का असंतुलन और गलत व्याख्याएं हानिकारक हो सकती हैं।