इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम, मुसलमानों के लिए विशेष महत्व रखता है। हदीसों में इस महीने की खूबियों और इसमें किए जाने वाले धार्मिक कार्यों का उल्लेख है। ये हदीस पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की शिक्षाओं पर आधारित हैं। मुहर्रम में उपवास रखने, दान करने और जरूरतमंदों की मदद करने जैसे कार्यों को प्रोत्साहित किया गया है। विद्वानों का मानना है कि इस महीने में की गई इबादत का फल कई गुना बढ़ जाता है। मुहर्रम, इस्लामी इतिहास में कर्बला की घटना की याद दिलाता है, जो शिया मुसलमानों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इस महीने में शोक व्यक्त करना और शहीदों को याद करना भी एक आम प्रथा है।