चेक टेनिस खिलाड़ी मार्केटा वोंड्रोउशोवा को दिसंबर 2025 में डोपिंग अधिकारी को नमूना देने से इनकार करने के कारण चार साल का प्रतिबंध लगाया गया है। इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने इस मामले की तुलना जानिक सिनर और इगा श्बियाटेक के डोपिंग मामलों से की, जिनमें उन्हें अपेक्षाकृत कम सजा मिली थी। सिनर और श्बियाटेक के डोपिंग टेस्ट पॉजिटिव आए थे, लेकिन उन्हें केवल कुछ महीनों के लिए निलंबित किया गया था। वोंड्रोउशोवा, जो 2023 में विंबलडन की विजेता हैं, पर नमूना देने से इनकार करने के कारण अधिक कठोर सजा दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों मामलों में परिस्थितियाँ अलग थीं, इसलिए सजा में अंतर होना स्वाभाविक है। वोंड्रोउशोवा के मामले में, उन्होंने सीधे तौर पर जांच में सहयोग करने से इनकार कर दिया, जबकि सिनर और श्बियाटेक के मामले में डोपिंग टेस्ट पॉजिटिव आया था। यह मामला डोपिंग नियमों और खिलाड़ियों के दायित्वों पर बहस को जन्म दे रहा है।