राष्ट्रीय सभा से हाल ही में पारित दूरसंचार विधेयक पर विवाद बढ़ता जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि विधेयक को पारित करने में जल्दबाजी दिखाई गई और प्रक्रिया में कई खामियां थीं। रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि विधेयक पर बहस के दौरान महत्वपूर्ण संशोधनों को नज़रअंदाज़ किया गया। कुछ सांसदों ने संभावित मिलीभगत की आशंका जताई है, खासकर विधेयक के कुछ विशिष्ट प्रावधानों को लेकर जो सरकार को व्यापक शक्तियां प्रदान करते हैं। सरकार का कहना है कि विधेयक देश में दूरसंचार क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक है और निवेशकों को आकर्षित करेगा। हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि इससे उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन हो सकता है और प्रतिस्पर्धा कम हो सकती है। इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही है ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।