एक दशक तक किशोरों पर किए गए अध्ययन में पाया गया है कि सोशल मीडिया के उपयोग से उनके मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट आती है। अध्ययन के अनुसार, एक वर्ष से अधिक समय तक सोशल मीडिया का उपयोग करने वाले किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने का खतरा होता है। हालांकि, यह अध्ययन हस्तक्षेप के लिए एक महत्वपूर्ण समय-सीमा भी दर्शाता है, जिससे नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि शुरुआती हस्तक्षेप से किशोरों को सोशल मीडिया के हानिकारक प्रभावों से बचाया जा सकता है। यह अध्ययन किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंताएं बढ़ाता है। निष्कर्षों से माता-पिता, शिक्षकों और नीति निर्माताओं को इस मुद्दे पर ध्यान देने और उचित कदम उठाने की आवश्यकता है। अध्ययन में शामिल किशोरों के व्यवहार और कल्याण पर लगातार निगरानी रखने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।