शिक्षिका सुज़ैन वीसिंगर के अनुसार, शहरी विद्यालयों में स्थिति बिगड़ती जा रही है। उनका कहना है कि विद्यालयों में बेलगाम आक्रामक बच्चे, एकीकरण के लिए अनिच्छुक माता-पिता और रूढ़िवादी इस्लाम के बढ़ते प्रभाव के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। वीसिंगर का मानना है कि अब विद्यालयों में धैर्य की सीमा समाप्त हो गई है। उनका जोर इस बात पर है कि परिवारों के प्रभाव को कम करने की आवश्यकता है। वे इस बात की चिंता व्यक्त करती हैं कि इस स्थिति से समानांतर समाज का निर्माण हो सकता है। उनका मानना है कि विद्यालयों और समाज के लिए यह एक गंभीर समस्या है जिसका समाधान आवश्यक है।