१९२८ में, बालकलावा की एक शिक्षिका, जेन डे ने पोर्ट लिंकन में डॉक किए गए एक फिनिश पाल नौका को देखा और जीवन भर की यात्रा के लिए एक लड़के के रूप में भेस बदलने का फैसला किया। उसने रोमांच की चाहत में यह जोखिम भरा कदम उठाया। डे ने खुद को एक पुरुष के रूप में प्रस्तुत किया ताकि वह जहाज़ पर यात्रा कर सके, जो उस समय महिलाओं के लिए आम नहीं था। यह कहानी साहस और लीक से हटकर कुछ करने की इच्छा को दर्शाती है। जहाज़ पर उसका अनुभव अज्ञात है, लेकिन यह घटना निश्चित रूप से एक असाधारण कारनामे के रूप में दर्ज है। डे का यह कदम उस समय की सामाजिक बाधाओं को चुनौती देने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह घटना आज भी लोगों को प्रेरित करती है।