कर प्रशासन निदेशालय (डीजीआई) ने कीमतों को स्थिर करने और प्रशासनिक बोझ को कम करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। डीजीआई ने अब चिकन, अंडे, फल और सब्जियों जैसे आवश्यक वस्तुओं के लिए वैट (मूल्य वर्धित कर) प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है। यह कदम व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए उठाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इससे वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। इस निर्णय से कर अनुपालन में आसानी होगी और बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी। यह बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और इसका उद्देश्य आम जनता को राहत पहुंचाना है। यह कदम प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
