यह लेख केएमटी (KMT) की अध्यक्ष चेंग ली-वुन द्वारा क्रॉस-स्ट्रेट संबंधों के लिए यूरोपीय संघ को एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने पर चर्चा करता है। लेखक इस बात की जांच करते हैं कि केएमटी के विमर्श में यूरोपीय संघ का उदाहरण बार-बार क्यों आता है। इसमें इस बात का विश्लेषण किया गया है कि क्या ताइवान जलडमरूमध्य की स्थितियां यूरोपीय एकीकरण की स्थितियों के समान हैं। लेखक का तर्क है कि युद्धोत्तर यूरोप के वे प्रमुख तत्व, जिन्होंने वहां एकीकरण को संभव बनाया, यहाँ पूरी तरह अनुपस्थित हैं। यह लेख विपक्षी कूटनीति की सीमाओं को भी रेखांकित करता है। अंततः, यह विश्लेषण यूरोपीय संघ के मॉडल की व्यवहार्यता पर सवाल उठाता है। यह दर्शाता है कि बाहरी संरचनाओं को सीधे लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।