ताइवान के संग्रहालय अब स्वदेशी समुदायों के साथ सक्रिय सहयोग की ओर बढ़ रहे हैं, केवल उनके अध्ययन तक सीमित नहीं रह गए हैं। इस बदलाव के तहत, पूर्वजों से जुड़ी कलाकृतियों को उनके मूल समुदायों को वापस लौटाने की भावनात्मक परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं। शोधकर्ता त्ज़ु-निंग ली के अनुसार, ये कलाकृतियां निष्क्रिय वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि रिश्ते और आध्यात्मिकता का सक्रिय विस्तार हैं। यह सहयोग संस्थागत अधिकार को चुनौती देता है और संग्रहालयों को गतिशील संवाद और ऐतिहासिक न्याय के लिए मंच बनाता है। यह प्रक्रिया धीमी और संबंध-आधारित है, जो आपसी समझ और सम्मान पर केंद्रित है। इस नए दृष्टिकोण से संग्रहालयों की भूमिका में महत्वपूर्ण बदलाव आ रहा है।