यह लेख, जिसका यह भाग २ है, अमेरिका-ताइवान पारस्परिक व्यापार समझौते (ART) और उसकी अनिवार्य "शून्य शुल्क" भर्ती नीतियों के ताइवानी मत्स्य उद्योग पर पड़ने वाले प्रभाव को दर्शाता है। इस नीति का उद्देश्य विदेशी प्रवासी श्रमिकों को शोषण से बचाना है, लेकिन इससे छोटे पैमाने के पोत मालिकों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता है, जो पहले से ही घटते उत्पादन और बढ़ती लागतों का सामना कर रहे हैं। शून्य शुल्क नीति के कारण, श्रमिकों की भर्ती लागत मालिकों को वहन करनी पड़ती है, जिससे उनकी लाभप्रदता कम हो जाती है। यह स्थिति छोटे मत्स्यपालों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वे पहले से ही आर्थिक दबाव में हैं। इस समझौते का प्रभाव ताइवानी मत्स्य उद्योग की दीर्घकालिक स्थिरता पर पड़ सकता है। आगे की जानकारी के लिए लेख को जारी रखें।