剴剴 मामले के बाद, यह सवाल उठ रहा है कि क्या 18 साल की उम्र में संस्थागत देखभाल से बाहर निकलने के बाद जीवन पूरी तरह से बदल सकता है। बच्चों को जब संस्थागत देखभाल में भेजा जाता है, तो यह उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ होता है। यह संस्थाएँ उन बच्चों को आश्रय और सुरक्षा प्रदान करती हैं जिनके माता-पिता उनकी देखभाल करने में असमर्थ हैं। लेकिन, 18 वर्ष की आयु में, इन बच्चों को स्वतंत्र जीवन जीने के लिए तैयार होना होता है। यह एक कठिन संक्रमण हो सकता है क्योंकि उन्हें आवास, शिक्षा, और रोजगार जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस लेख में, यह विश्लेषण किया गया है कि क्या संस्थागत देखभाल से निकलने के बाद इन युवाओं के जीवन को सकारात्मक रूप से बदला जा सकता है, और उन्हें समाज में सफल होने के लिए किस तरह की सहायता की आवश्यकता है। यह जोर दिया गया है कि उचित समर्थन और अवसर प्रदान करके, संस्थागत देखभाल से निकलने वाले युवाओं को एक बेहतर भविष्य मिल सकता है।