एक विशेषज्ञ का मानना है कि यदि समाज में परजीवी प्रवृत्ति – यानी दूसरों या राजनीतिक-आर्थिक प्रणाली का शोषण करके जीने की आदत – बहुत अधिक बढ़ जाती है, तो व्यवस्था का पतन अवश्यंभावी है। यह पतन कब होगा, यह अनिश्चित है, लेकिन यह निश्चित है कि यह होगा। मुख्य प्रश्न यह है कि इस पतन से कितने लोग, व्यवसाय और संस्थान प्रभावित होंगे। विशेषज्ञ का तर्क है कि किसी भी प्रणाली की स्थिरता इस बात पर निर्भर करती है कि वह अपने सदस्यों से कितना योगदान प्राप्त करती है। यदि बहुत से लोग योगदान करने के बजाय केवल लेने पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो प्रणाली अंततः ढह जाएगी। यह स्थिति सामाजिक और आर्थिक दोनों तरह के परिणामों को जन्म दे सकती है। इस चेतावनी को ध्यान में रखते हुए, समाज को परजीवी व्यवहार को कम करने और उत्पादकता और योगदान को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठाने चाहिए।