निकोलास लुनाबास की बेस्टसेलर आत्मकथा पर बनी फिल्म सूक्ष्मता से परिपूर्ण नहीं है, लेकिन यह दर्शकों को बांधे रखने वाली तीव्रता और गति से इसकी भरपाई करती है। फिल्म मालमो की सड़कों की जीवंत फोटोग्राफी प्रस्तुत करती है। समीक्षक फ्रेडरिक साहलीन के अनुसार, फिल्म में एक शक्तिशाली ऊर्जा है जो दर्शकों को आकर्षित करती है। यह फिल्म लुनाबास के जीवन के अनुभवों को तीव्र और भावनात्मक रूप से दर्शाती है। हालांकि यह पुस्तक की सूक्ष्म बारीकियों को पूरी तरह से नहीं पकड़ पाती, लेकिन इसकी मनोरंजन क्षमता निर्विवाद है। फिल्म की कहानी दर्शकों को अंत तक जोड़े रखती है और प्रभावित करती है। यह एक ऐसी फिल्म है जो निश्चित रूप से देखने लायक है।