स्वीडन में हुए चुनावों के विश्लेषण से पता चलता है कि यदि केवल पुरुषों को मतदान का अधिकार होता, तो टिडो दल (Tidöpartierna) को स्पष्ट बहुमत मिल सकता था। सोशल डेमोक्रेट्स की वरिष्ठ नेता अन्नीका स्ट्रैंडहॉल का कहना है कि वर्तमान कार्यकाल में दक्षिणपंथी नीतियों का मुख्य लाभ पुरुषों को ही मिला है। उन्होंने विपक्षी दलों को इस तथ्य पर ध्यान देने और अपनी रणनीति में सुधार करने की सलाह दी है। स्ट्रैंडहॉल के अनुसार, नीतियों के प्रभाव में लिंग आधारित असमानता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यह विश्लेषण स्वीडिश राजनीति में लिंग और मतदान व्यवहार के बीच संबंध को उजागर करता है। चुनाव परिणामों की यह व्याख्या राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती है। यह दर्शाता है कि विभिन्न जनसांख्यिकीय समूहों के बीच नीतिगत प्राथमिकताओं में अंतर है।