हाल ही में प्रकाशित एक जनमत सर्वेक्षण में लिबरल पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद, स्वीडन की टिडो पार्टियां चुनाव से पहले ही कमजोर स्थिति में आ गई हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, मतदाताओं पर वामपंथी सरकार के खिलाफ नकारात्मक प्रचार का कोई खास असर नहीं पड़ा है। टिडो दलों के लिए अब यह एक बड़ी चुनौती है कि वे अपनी स्थिति को सुधार सकें और मतदाताओं को आकर्षित कर सकें। विश्लेषकों का मानना है कि दलों को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने और मतदाताओं को लुभाने के लिए नए तरीके खोजने की आवश्यकता है। फिलहाल, चुनाव प्रचार शुरू होने से पहले ही टिडो दलों के लिए वापसी की राह कठिन दिखाई दे रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि वे इस स्थिति से कैसे निपटते हैं और चुनाव में कैसा प्रदर्शन करते हैं।