पISA अध्ययन के नए परिणामों की जानकारी सरकार को आधिकारिक घोषणा से चार दिन पहले मिल गई है। इस निर्णय से स्कॉल्वेरकेट (Skolverket) के भीतर आंतरिक विरोध हुआ है। इसका मतलब है कि सरकार को ऐसी जानकारी मिल गई है जिसका राजनीतिक महत्व हो सकता है, और यह जानकारी चुनाव प्रचार के अंतिम दिनों में उपलब्ध कराई गई है। आलोचकों का तर्क है कि यह कदम उचित नहीं है क्योंकि इससे सरकार को राजनीतिक लाभ मिल सकता है। स्कॉल्वेरकेट के कुछ अधिकारियों ने इस जानकारी को जल्दी जारी करने पर चिंता व्यक्त की है। यह घटना पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाती है, खासकर चुनाव के समय। इस मामले में आगे जांच की मांग की जा रही है।

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