स्वीडिश समाज अभी भी एक्सपो जैसे संस्थानों द्वारा समर्थित है। बीयॉर्न विमन के अनुसार, एक ऐसे लोकतंत्र के लिए काम करना जहां नस्लवादी संगठनों का कोई प्रभाव न हो, बिल्कुल भी मूर्खतापूर्ण विचार नहीं है। यह लेख स्वीडन में नवनाज़ीवाद के उदय और इसके खिलाफ सुरक्षा उपायों पर केंद्रित है। लेखक बर्लिन की दीवार के पतन और वर्तमान स्थिति के बीच समानताएं खींचते हैं, यह सवाल उठाते हुए कि क्या नस्लवाद के खिलाफ सुरक्षा दीवार भी विफल हो सकती है। यह स्वीडन में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के महत्व पर जोर देता है। यह नस्लवादी विचारधाराओं से निपटने में सक्रिय दृष्टिकोण की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है। लेखक का तर्क है कि लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत करने और नस्लवाद का विरोध करने के प्रयासों को जारी रखना महत्वपूर्ण है।