स्वीडन सरकार के दबाव के बाद यूरोपीय संघ ने तालिबान शासन को ब्रुसेल्स में वार्ता के लिए आमंत्रित किया है। इस कदम का उद्देश्य अधिक अफगान अपराधियों को निष्कासित करना है। हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि इससे संघ एक उग्रवादी शासन को वैधता प्रदान कर रहा है। स्वीडन के प्रवासन मंत्री जोहान फोर्सल ने कहा कि यह स्वीडिश हितों की रक्षा करने का मामला है। यह वार्ता अफगानिस्तान से अपराधियों के निर्वासन की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने पर केंद्रित होगी। यूरोपीय संघ का यह निर्णय मानवाधिकार संगठनों और कुछ सदस्य देशों द्वारा आलोचना का विषय बना हुआ है। आलोचकों का मानना है कि तालिबान के साथ बातचीत करने से उनकी नीतियों को स्वीकार किया जा रहा है।
