स्वीडन में शरण प्रक्रिया में हाल ही में हुए एक बड़े बदलाव के कारण कुछ लोगों को कानूनी तौर पर ‘अस्तित्वहीन’ माना जा रहा है, भले ही वे देश में मौजूद हों। कानूनी विशेषज्ञ साइलास अलिकी के अनुसार, यह स्थिति मानवाधिकारों के उल्लंघन और सामाजिक अनुबंध को तोड़ने का खतरा पैदा करती है। इस बदलाव के परिणामस्वरूप, इन व्यक्तियों को बुनियादी अधिकार और सामाजिक सहायता प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है। अलिकी का तर्क है कि यह कदम स्वीडिश कानून और अंतर्राष्ट्रीय समझौतों के खिलाफ है। यह मुद्दा उन शरणार्थियों और प्रवासियों के लिए विशेष चिंता का विषय है जिनकी कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं है। आलोचकों का कहना है कि यह नीति मानवीय गरिमा और न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। इस मामले पर स्वीडिश सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की जा रही है।