यह कहानी एक हंस के बच्चे के बचाव की है, जिसे शुरू में एक सुखद अंत वाली कहानी माना जा रहा था। लोगों ने बच्चे का उपचार किया और उसे वापस पानी में उसके परिवार के पास भेजने की तैयारी की। हालांकि, वास्तविकता उम्मीद के विपरीत और काफी दर्दनाक निकली। जब बच्चे को उसके माता-पिता के पास ले जाया गया, तो उन्होंने उसे अपनाने के बजाय उस पर हमला कर दिया। हंसों ने बच्चे को डुबोकर मारने की कोशिश की, जो प्रकृति के व्यवहार का एक चौंकाने वाला पहलू था। बचाव दल को एक बार फिर हस्तक्षेप करना पड़ा ताकि बच्चे की जान बचाई जा सके। इस घटना ने दिखाया कि वन्यजीवों का व्यवहार हमेशा अनुमानित नहीं होता है। अंततः, बचावकर्ताओं ने बच्चे को उसके अपने माता-पिता के प्रकोप से सुरक्षित निकाला।
