उपभोक्ताओं पर फिर से भार पड़ रहा है क्योंकि शुल्क संरचना में बदलाव किया गया है। कैश और कार्ड सिस्टम के तहत कीमतों में समस्या बनी हुई है। उपभोक्ताओं को अब पहले से ज़्यादा चुकाना पड़ रहा है, जिससे उनकी जेब पर असर पड़ रहा है। इस पूरे मामले में पारदर्शिता का अभाव है, जिससे उपभोक्ताओं को सही मूल्य निर्धारण को समझने में कठिनाई हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए ताकि उपभोक्ताओं के अधिकारों का संरक्षण किया जा सके। इस शुल्क परिवर्तन से बाजार में प्रतिस्पर्धा का माहौल भी प्रभावित हो सकता है और उपभोक्ताओं के लिए विकल्पों का अभाव हो सकता है। इससे उपभोक्ताओं और व्यापारियों के बीच विश्वास कम हो सकता है।