अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि जेल में बंद कैदियों द्वारा धार्मिक स्वतंत्रता के आधार पर जेल कर्मचारियों के खिलाफ़ आर्थिक हर्जाने के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। यह फैसला एक रस्ताफ़री धर्म के अनुयायी कैदी द्वारा दायर किए गए मुकदमे पर आया है, जिसकी जेल अधिकारियों ने दाढ़ी कटवा दी थी। अदालत ने निचले न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि धार्मिक स्वतंत्रता बहाली अधिनियम (RFRA) के तहत जेल कर्मचारियों को व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत का मानना है कि RFRA का उद्देश्य सरकारी कार्रवाई को चुनौती देना है, व्यक्तिगत कर्मचारियों को नहीं। इस फैसले से जेलों में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों को लेकर बहस छिड़ सकती है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला कैदियों के अधिकारों को सीमित करता है और जेल प्रशासन को अधिक छूट देता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह फैसला धार्मिक स्वतंत्रता के महत्व को कम नहीं करता है, बल्कि यह केवल कानूनी दायित्व के दायरे को परिभाषित करता है।
