2022 में स्थापित राष्ट्रीय सूचना केंद्र, जिसका उपयोग पहले सरकार द्वारा नागरिक संगठनों और मीडिया आउटलेट्स पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए किया जाता था, अब रूफ बालिंथ के अधीन आ गया है। पहले इस एजेंसी की निगरानी रोगां करते थे। यह कदम हंगरी में सूचना नियंत्रण और निगरानी को लेकर चिंताएं बढ़ाता है। आलोचकों का तर्क है कि यह सरकार को अपने विरोधियों पर और अधिक नियंत्रण रखने की अनुमति देगा। इस कदम से स्वतंत्र मीडिया और नागरिक समाज की स्वतंत्रता पर असर पड़ने की आशंका है। यह स्पष्ट नहीं है कि एजेंसी के कार्यों में क्या बदलाव होंगे, लेकिन पारदर्शिता की कमी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस हस्तांतरण से एजेंसी की निष्पक्षता और जवाबदेही पर भी सवाल उठते हैं।

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