मूर्तिकार और डॉक्यूमेंट्री फोटोग्राफर उबे तालहा अक्काया ने 'योल' नामक एक बहुविषयक प्रदर्शनी प्रस्तुत की है। यह प्रदर्शनी सूफी संस्कृति और दervish (दरवेश) की आंतरिक आध्यात्मिक यात्रा पर केंद्रित है। इसमें एक दरवेश की आंतरिक यात्रा की सात अलग-अलग अवस्थाओं को दर्शाया गया है। इन अवस्थाओं को कला के विभिन्न माध्यमों और विधाओं के जरिए प्रस्तुत किया गया है। यह आयोजन पारंपरिक सूफी दर्शन को आधुनिक कलात्मक अभिव्यक्ति के साथ जोड़ता है। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य दर्शकों को आध्यात्मिकता के गहरे अनुभवों से अवगत कराना है। यह कलाकृति आधुनिक विमर्श और प्राचीन सूफी परंपराओं के बीच एक सेतु का कार्य करती है।