सूडान की सेना में पिछले कुछ महीनों से मिलिशिया समूहों, विशेष रूप से रैपिड सपोर्ट फोर्सेस (आरएसएफ) के कई कमांडर शामिल हो रहे हैं। हाल ही में, आरएसएफ के एक प्रमुख कमांडर अली रिजकल्लाह को सेना में शामिल किया गया, जिसका स्वागत एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया गया और उन्हें तुरंत सशस्त्र बलों में पद दे दिया गया। इस घटना से सूडान में आक्रोश फैल गया है, क्योंकि लोगों का मानना है कि ये कमांडर दारफुर में पिछले तीन वर्षों में किए गए अत्याचारों के लिए जवाबदेही से बच सकते हैं। सेना इन भर्तियों को स्वागत योग्य मान रही है, लेकिन नागरिकों का कहना है कि यह पीड़ितों के लिए न्याय को कमजोर करता है। आलोचकों का तर्क है कि यह कदम संघर्षरत गुटों के बीच सुलह के प्रयासों को भी बाधित कर सकता है। इस स्थिति ने सूडान में मानवाधिकार और जवाबदेही को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। यह घटनाक्रम सूडान में चल रहे राजनीतिक और सुरक्षा संकट को और जटिल बना रहा है।
