वर्ष 2024 में सड़कों पर उत्पीड़न को अपराध घोषित करने के बाद से अब तक केवल छह जुर्माने जारी किए गए हैं। हालांकि, महिलाओं की सुरक्षा की भावना में कोई सुधार नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि जुर्माने के माध्यम से इस तरह की समस्या का समाधान करना व्यावहारिक रूप से असंभव है। न्यूज़ वैन डे दाग कार्यक्रम में इस विषय पर चर्चा की गई। जुर्माने की कमी और सुरक्षा की भावना में सुधार न होने से कानून की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। यह मामला दर्शाता है कि केवल कानूनी कार्रवाई ही उत्पीड़न को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है। इस समस्या से निपटने के लिए व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक बदलावों की आवश्यकता है।