स्टीव जॉब्स ने 1982 में एस्पेन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय डिज़ाइन सम्मेलन में बुद्धिमत्ता को लेकर एक दिलचस्प विचार प्रस्तुत किया था। उन्होंने बताया कि सच्ची बुद्धिमत्ता किसी व्यक्ति की बुद्धिलब्धि या ज्ञान से नहीं, बल्कि किसी चीज़ को सीखने और समझने की क्षमता से पहचानी जा सकती है। जॉब्स का मानना था कि जो व्यक्ति जल्दी से नई चीजें सीख सकता है और जटिल समस्याओं को सुलझा सकता है, वही वास्तव में बुद्धिमान होता है। उन्होंने इस क्षमता को बुद्धिमत्ता का एक महत्वपूर्ण मापदंड बताया। यह विचार उन लोगों के लिए प्रेरणादायक है जो लगातार सीखने और विकसित होने का प्रयास करते हैं। जॉब्स के इस दृष्टिकोण ने शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है।

English
Français
Español
हिन्दी
中文