सैफ चंदन द्वारा निर्देशित फिल्म ‘मालिक’ में व्यावसायिक सिनेमा के सभी आवश्यक तत्व मौजूद थे, लेकिन यह फिल्म दर्शकों को आकर्षित करने में असफल रही। फिल्म में सभी मसाले और आकर्षक पहलू होने के बावजूद, कहानी दर्शकों को बांधने में नाकाम रही। समीक्षकों और दर्शकों दोनों ने ही फिल्म को लेकर निराशा व्यक्त की है। यह फिल्म एक अधूरे सपने या ‘आক্ষেপ’ के रूप में रह गई है। फिल्म निर्माण टीम ने सभी संभावित प्रयास किए, फिर भी अपेक्षित सफलता हासिल नहीं हो पाई। फिल्म की असफलता के कारणों का विश्लेषण किया जा रहा है, जिसमें कहानी की कमजोर कड़ी या प्रस्तुति में कमी को माना जा सकता है। कुल मिलाकर, ‘मालिक’ एक ऐसी फिल्म है जिसमें क्षमता थी, लेकिन वह उसे प्रदर्शित करने में विफल रही।