जुलाई में उपभोक्ता मूल्य वृद्धि दर 2% से ऊपर रही, जो कि तीन महीनों में पहली बार है। हालांकि, मुद्रास्फीति की दर 2.8% तक पहुंच गई है, जो पहले की तुलना में थोड़ी धीमी है। ऐसा मुख्य रूप से तेल की कीमतों में वृद्धि की गति धीमी होने के कारण हुआ है। मध्य पूर्व में तनाव के कारण तेल की कीमतों में पहले तेजी आई थी, लेकिन अब इसमें गिरावट आई है। यह डेटा दर्शाता है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार का घरेलू मुद्रास्फीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। सरकार इस स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है और कीमतों को स्थिर रखने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। उपभोक्ता खर्च और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिति भी मुद्रास्फीति को प्रभावित करते हैं।