केंद्रीय चुनाव आयोग ने पिछले राष्ट्रपति चुनाव में मतदान पत्रों की कमी की स्थिति के बारे में आंतरिक रूप से जानकारी साझा नहीं की। आयोग ने स्थानीय चुनावों के लिए मतदान पत्रों की छपाई की मात्रा कम करने का निर्णय लिया, लेकिन इस निर्णय के पीछे पिछले चुनाव में हुई कमी का उल्लेख नहीं किया गया। हैरानी की बात यह है कि आयोग द्वारा गठित आंतरिक टास्क फोर्स को भी इस समस्या के बारे में जानकारी नहीं थी। यह मामला पारदर्शिता और आंतरिक संचार को लेकर सवाल खड़े करता है। विपक्ष ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है। इस घटना से चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी प्रश्नचिन्ह लग सकते हैं। यह जानकारी एक मीडिया रिपोर्ट के माध्यम से सामने आई है, जिससे आयोग की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।