दक्षिण ऑस्ट्रेलिया सरकार द्वारा घरेलू, पारिवारिक और यौन हिंसा पर पिछले वर्ष की शाही आयोग की सिफारिशों के बावजूद, शराब वितरण को लेकर प्रस्तावित कानून में देरी हो रही है। हिंसा विरोधी कार्यकर्ताओं ने इस देरी पर चिंता व्यक्त की है। आयोग ने शराब की आसान उपलब्धता को हिंसा के एक कारक के रूप में पहचाना था और डिलीवरी पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया था। कार्यकर्ताओं का कहना है कि कानून में देरी से हिंसा के शिकार लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। सरकार का कहना है कि वह इस मुद्दे पर काम कर रही है, लेकिन समय-सीमा स्पष्ट नहीं है। इस देरी से घरेलू हिंसा की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों पर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ितों की सहायता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।
