दक्षिण अफ्रीका में अप्रवासियों के खिलाफ नफ़रत फैलाने वाले समूहों ने 30 जून की समय-सीमा दी थी, जिसके बाद सभी अनियमित अप्रवासियों को देश छोड़ने की मांग की गई थी। इस समय-सीमा से पहले, ज़ेनोफोबिक हिंसा में वृद्धि देखी गई, जिसमें विदेशी स्वामित्व वाले व्यवसायों पर हमले और विरोध प्रदर्शनों के दौरान अप्रवासियों की हत्याएं शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों ने बिना किसी सबूत के अप्रवासियों पर नौकरियां छीनने, सार्वजनिक सेवाओं को ध्वस्त करने और अपराध बढ़ाने का आरोप लगाया है, जबकि वे देश की कुल आबादी का लगभग 4% ही हैं। इस स्थिति के कारण हजारों अप्रवासी डर के मारे पलायन कर रहे हैं। सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं, लेकिन तनाव अभी भी बना हुआ है। मानवाधिकार संगठनों ने हिंसा की निंदा की है और सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया है। यह घटना दक्षिण अफ्रीका में अप्रवासन और सामाजिक तनाव के मुद्दे को उजागर करती है।
