हाल के अध्ययनों से पता चला है कि कुछ लोगों को सामान्य आवाज़ें, जैसे चबाना, साँस लेना या टाइपिंग की आवाज़, अत्यधिक परेशान कर सकती हैं। इस स्थिति को मिज़ोफ़ोनिया कहा जाता है, जो एक पुरानी स्थिति है जिसमें कुछ विशिष्ट आवाज़ें तीव्र भावनात्मक प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न करती हैं। यह प्रतिक्रिया क्रोध, घृणा या चिंता के रूप में प्रकट हो सकती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि मिज़ोफ़ोनिया मस्तिष्क में तंत्रिका संबंधी अंतर से जुड़ा हो सकता है। यह स्थिति दैनिक जीवन को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकती है, जिससे सामाजिक और व्यावसायिक संबंध तनावपूर्ण हो सकते हैं। मिज़ोफ़ोनिया से पीड़ित लोगों के लिए थेरेपी और मुकाबला करने की रणनीतियाँ उपलब्ध हैं।