उस्मान सोन्को ने तिदियन समुदाय के खलीफा जनरल से मुलाकात के दौरान राजनीतिक निधियों को लेकर चल रहे विवाद पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने कभी भी इन निधियों को समाप्त करने की मांग नहीं की, जिन्हें अक्सर "ब्लैक फंड" कहा जाता है। सोन्को का रुख इनका विनियमन और इनके उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। उनका कहना है कि नागरिकों को सार्वजनिक धन के उपयोग की शर्तों को जानने का अधिकार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक निधियों के प्रबंधन पर उनकी टिप्पणियां धार्मिक अधिकारियों को लक्षित नहीं हैं, बल्कि पारदर्शिता की कमी पर उनका ध्यान केंद्रित है। सोन्को का मानना है कि सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता इस्लामी सिद्धांतों के अनुरूप एक बुनियादी आवश्यकता है। उन्होंने सार्वजनिक निधियों के बेहतर प्रबंधन के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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