सरकार द्वारा स्थापित हरित बैंक ने एक सौर ऊर्जा परियोजना में आ रही दिक्कतों के कारण सार्वजनिक धन जारी करने पर रोक लगा दी है। यह परियोजना एक संयुक्त उद्यम के माध्यम से चलाई जा रही थी, लेकिन रणनीतिक मतभेदों के कारण यह उद्यम टूट गया है। परियोजना की प्रगति पर तेज़ी से निर्णय लेने वाली समिति ने भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। इस परियोजना में देरी होने से नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी बाधा आ सकती है। बैंक का कहना है कि धन तब तक जारी नहीं किया जाएगा जब तक कि परियोजना से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता। यह कदम सरकारी निवेशों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले से भविष्य की सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए एक मिसाल कायम हो सकती है।