रोचेस्टर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक नई सौर ऊर्जा प्रणाली विकसित की है जो पानी और नमक को अलग करने में सक्षम है। यह तकनीक किसी भी जहरीले लवण युक्त अपशिष्ट जल का उत्पादन नहीं करती है। पारंपरिक अलवणीकरण प्रक्रियाओं के विपरीत, यह प्रणाली खनिजों को ठोस रूप में प्राप्त करने की अनुमति देती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अलवणीकरण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। यह नई प्रणाली स्वच्छ जल उत्पादन के लिए एक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प प्रदान करती है। इस तकनीक से उन क्षेत्रों में पीने योग्य पानी की उपलब्धता बढ़ सकती है जहाँ खारे पानी के स्रोत मौजूद हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज जल संकट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
